अंधेरे में खूंखार होते आवारा कुत्ते – सड़कों पर बढ़ता खौफ!
शहर में बढ़ रहा कुत्तों का आतंक, रात के समय बढ़ती घटनाएं
रात के अंधेरे में सड़कों पर घूमते आवारा कुत्तों का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है। कई वाहन चालक इन कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं। खासकर वे लोग जो देर रात घर लौटते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
रात के समय अधिक आक्रामक होते हैं कुत्ते
रात के समय कुत्तों के झुंड इकट्ठा होकर वाहनों के पीछे दौड़ते हैं। पशु विशेषज्ञों के अनुसार, अंधेरे में कुत्ते अधिक सतर्क और आक्रामक हो जाते हैं। दिन में वे शांत रहते हैं, लेकिन रात के समय वे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं, जिससे उनका व्यवहार आक्रामक हो जाता है।
👉 सम्बंधित जानकारी: भारतीय पशु कल्याण बोर्ड
राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बढ़ता खतरा
बड़े शहरों और कस्बों में यह समस्या आम होती जा रही है। कई बार ये कुत्ते राहगीरों पर हमला कर देते हैं। हाल ही में कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां कुत्तों ने लोगों को काट लिया या बाइक चालकों का पीछा किया, जिससे हादसे हुए।
👉 आवारा कुत्तों से सुरक्षा के उपाय: नगर निगम का दिशा-निर्देश
नगर निगम की लापरवाही, जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा प्रशासन
नगर निगम की जिम्मेदारी है कि आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर नियंत्रण रखा जाए। इसके लिए स्टरलाइज़ेशन और टीकाकरण की प्रक्रिया जरूरी है, लेकिन इन योजनाओं पर सही से अमल नहीं किया जा रहा।
👉 आधिकारिक रिपोर्ट: नगर निगम वेबसाइट
रबीज़ का बढ़ता खतरा – स्वास्थ्य पर असर
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या के कारण रबीज़ जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते कुत्तों को टीका नहीं लगाया गया, तो यह महामारी का रूप ले सकता है।
👉 रबीज़ से बचाव के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
समाधान क्या है?
🔹 स्टरलाइज़ेशन कार्यक्रम को तेज़ी से लागू करना 🔹 टीकाकरण अभियान को सख्ती से लागू करना 🔹 शहरों और कस्बों में कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाना 🔹 लोगों को जानवरों के प्रति जागरूक करना
👉 पढ़ें: पशु कल्याण और सुरक्षा कानून
आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने के लिए प्रशासन और जनता दोनों को मिलकर काम करना होगा। यह केवल एक सुरक्षा मुद्दा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से भी जुड़ा हुआ विषय है। नगर निगम और पशु कल्याण बोर्ड को इस ओर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
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