सुनिता विलियम्स का भारत से पहला इंटरव्यू: अंतरिक्ष में 9 महीने की मिशन पर, जानें खास बातें

सुनिता विलियम्स का भारत से पहला इंटरव्यू: अंतरिक्ष में 9 महीने की मिशन पर, जानें खास बातें


NASA की प्रमुख अंतरिक्ष यात्री सुनिता विलियम्स ने भारत से अपने पहले इंटरव्यू में अंतरिक्ष मिशन के दौरान अपनी यात्रा के अनुभवों को साझा किया। यह इंटरव्यू अंतरिक्ष में रहते हुए भारतीय मीडिया के साथ हुआ, और उन्होंने पहली बार इस तरह के अनुभवों को सार्वजनिक किया। सुनिता ने अपने मिशन के दौरान की चुनौतियों, स्पेसएक्स के साथ किए गए सहयोग, और भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान पर भी चर्चा की।

आप इस इंटरव्यू को लाइव देख सकते हैं, – 

सुनिता विलियम्स का करियर और अंतरिक्ष में यात्रा

सुनिता विलियम्स ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत 2006 में की थी, जब उन्होंने अपना पहला मिशन “STS-116” लॉन्च किया। इसके बाद, उन्होंने अंतरिक्ष में कुल 7 मिशनों में भाग लिया और लगभग 322 दिन अंतरिक्ष में बिताए। सुनिता का यह 9 महीने का मिशन विशेष रूप से महत्वपूर्ण था क्योंकि उन्होंने इस दौरान कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए और अंतरिक्ष विज्ञान के कई पहलुओं पर शोध किया।

उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में रहकर काम करना सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण होता है। वह कहती हैं, “अंतरिक्ष में मनुष्य की शारीरिक संरचना में बहुत बदलाव होते हैं, जैसे कि मांसपेशियों की कमजोरी और हड्डियों का पतला होना, लेकिन फिर भी अंतरिक्ष में काम करने की प्रक्रिया बहुत ही रोमांचक होती है।”

भारत के साथ सुनिता विलियम्स का विशेष संबंध

भारत के साथ सुनिता का विशेष संबंध रहा है, क्योंकि वह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से भी जुड़ी रही हैं। वह कहती हैं, “भारत में अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में बहुत प्रगति हुई है, और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता ने मुझे हमेशा प्रभावित किया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और मुझे गर्व है कि मैं भारत से जुड़ी हूं।”

सुनिता ने भारत के युवा वैज्ञानिकों के साथ भी काम किया है और उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान को सराहा। वह कहती हैं, “भारत के युवा वैज्ञानिकों में बहुत संभावनाएं हैं, और उनका योगदान वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है।”

स्पेसएक्स और NASA का सहयोग

सुनिता ने अपने अंतरिक्ष मिशन के दौरान NASA और स्पेसएक्स के बीच सहयोग के बारे में भी बात की। वह कहती हैं, “स्पेसएक्स के साथ हमारा सहयोग अद्भुत रहा है। उनके साथ काम करने से अंतरिक्ष यात्रा को और भी सहज और प्रभावी बनाने में मदद मिली है। स्पेसएक्स ने हमें कई नई तकनीकों से लैस किया है, जिससे हम अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बना सकते हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि स्पेसएक्स के रॉकेट्स और तकनीक ने अंतरिक्ष यात्री की यात्रा को और भी आसान और सुरक्षित बना दिया है। उनके अनुसार, अंतरिक्ष यात्रा के दौरान कोई भी छोटी सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञता का होना बेहद महत्वपूर्ण है।

अंतरिक्ष में जीवन: एक अनोखा अनुभव

अंतरिक्ष में जीवन जीने के अनुभव को सुनिता विलियम्स ने अपने तरीके से साझा किया। वह कहती हैं, “अंतरिक्ष में दिन और रात का कोई अंतर नहीं होता। वहां हर समय सूर्य की रोशनी होती है, और इसलिए आपको अपनी दिनचर्या को बहुत व्यवस्थित तरीके से रखना होता है। मुझे हर दिन अपने समय का प्रबंधन करना बहुत चुनौतीपूर्ण लगता था, क्योंकि सब कुछ एक जैसे ही रहता है।”

सुनिता ने यह भी कहा कि अंतरिक्ष में रहना मानसिक रूप से कठिन होता है, क्योंकि आपको अपने परिवार और दोस्तों से दूर रहना पड़ता है। लेकिन इस कठिनाई के बावजूद, वह कहती हैं, “यह एक अद्भुत अनुभव है, क्योंकि आप पृथ्वी से लाखों किलोमीटर दूर होते हुए भी हर दिन कुछ नया सीखते हैं।”

भारतीय महिलाओं के लिए संदेश

सुनिता विलियम्स ने भारतीय महिलाओं के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश दिया। वह कहती हैं, “महिलाएं किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं, बस उनके पास मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास होना चाहिए। मैंने भी अपनी यात्रा में बहुत सी चुनौतियों का सामना किया, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी और अंततः मुझे सफलता मिली।”

उनके अनुसार, भारतीय महिलाएं अंतरिक्ष, विज्ञान, और तकनीकी क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं, और उन्हें कभी भी अपने सपनों को पूरा करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। वह युवा लड़कियों को प्रेरित करती हैं कि वे अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करें और अपने सपनों को पूरा करने के लिए काम करें।

सुनिता विलियम्स का भारत से पहला इंटरव्यू एक ऐतिहासिक पल है, जो न केवल उनके व्यक्तिगत करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला सशक्तिकरण, विज्ञान और तकनीकी प्रगति की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। उनका अंतरिक्ष मिशन न केवल वैज्ञानिक शोध और प्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि यह भारत और अन्य देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।

सुनिता ने जो अनुभव साझा किए, वह हमें यह सिखाते हैं कि चाहे हम किसी भी क्षेत्र में हों, मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।


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