सड़कों पर ईद की नमाज़ पर रोक के आदेश से भड़के मुनव्वर फारूकी, सोशल मीडिया पर कह दी बड़ी बात!

सड़कों पर ईद की नमाज़ पर रोक के आदेश से भड़के मुनव्वर फारूकी, सोशल मीडिया पर कह दी बड़ी बात!


मेरठ पुलिस द्वारा ईद की नमाज़ को लेकर दिए गए आदेश पर स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाते हुए कहा कि इस तरह के आदेश धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ हैं। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है और मुनव्वर फारूकी ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है।

मेरठ पुलिस का आदेश और विवाद

मेरठ पुलिस ने ईद के मौके पर सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ अदा करने को लेकर एक निर्देश जारी किया था। आदेश के अनुसार, ईद की नमाज़ केवल मस्जिदों, ईदगाहों या तय स्थानों पर ही अदा की जा सकेगी। पुलिस प्रशासन ने यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया था।

हालांकि, इस आदेश के सामने आने के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाने जैसा बताया। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

मुनव्वर फारूकी की प्रतिक्रिया

मुनव्वर फारूकी, जो अपने स्टैंड-अप कॉमेडी और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं, ने इस आदेश पर नाराजगी जताई। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा:

“धार्मिक स्वतंत्रता हर भारतीय नागरिक का अधिकार है। इस तरह के आदेश समाज में असमानता को बढ़ावा देते हैं। अगर सड़क पर कांवड़ यात्रा निकल सकती है, गणपति विसर्जन हो सकता है, तो ईद की नमाज़ में क्या समस्या है?”

मुनव्वर फारूकी का पोस्ट:

उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और गर्मा गया और कई लोगों ने उनके समर्थन में प्रतिक्रिया दी, जबकि कुछ ने उनकी आलोचना भी की।

सोशल मीडिया पर बहस तेज

मुनव्वर फारूकी के बयान के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया। कुछ लोग उनके समर्थन में सामने आए और कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने पुलिस के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि किसी भी धर्म के लिए सार्वजनिक स्थानों का अतिक्रमण सही नहीं है।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा: “सड़क पर नमाज़ पढ़ने की इजाजत नहीं देना गलत नहीं है। अगर यह कानून-व्यवस्था का मामला है, तो इसे धार्मिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा: “जब गणपति विसर्जन और कांवड़ यात्रा पर कोई रोक नहीं है, तो ईद की नमाज़ पर क्यों? ये साफ तौर पर भेदभाव है।”

पुलिस प्रशासन का जवाब

इस पूरे विवाद पर मेरठ पुलिस का कहना है कि यह आदेश किसी विशेष समुदाय को टारगेट करने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय केवल भीड़भाड़ और यातायात नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

मेरठ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा: “हमने यह आदेश किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी समुदायों के हित में दिया है। किसी भी धार्मिक आयोजन से ट्रैफिक और आम जनजीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए।”

धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कानून व्यवस्था

यह मुद्दा सिर्फ मेरठ या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। देशभर में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रशासन द्वारा पाबंदियां लगाई जाती हैं। सवाल यह है कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का उपयोग सही है या फिर कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए?

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी धर्म के धार्मिक आयोजन को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की असमानता और विवाद से बचा जा सके। वहीं, दूसरी ओर कुछ लोग इसे धार्मिक भेदभाव का मुद्दा बताते हैं और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं।

मुनव्वर फारूकी पहले भी विवादों में रहे हैं

यह पहली बार नहीं है जब मुनव्वर फारूकी किसी विवाद में घिरे हैं। इससे पहले भी वे अपने कॉमेडी शो और बयानों के चलते कई बार विवादों में आ चुके हैं। उन्हें हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा, उनके कई शो सुरक्षा कारणों से रद्द किए जा चुके हैं।


मेरठ पुलिस के इस आदेश और मुनव्वर फारूकी की प्रतिक्रिया के बाद यह बहस छिड़ गई है कि धार्मिक आयोजनों को सार्वजनिक स्थानों पर अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। जहां एक ओर पुलिस कानून-व्यवस्था का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थक इसे असमानता का मुद्दा मान रहे हैं।

यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर कोई आधिकारिक समाधान निकलता है या नहीं।


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