धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान: “जो राणा सांगा पर सवाल उठाए, उनकी बुद्धि की शुद्धि होनी चाहिए”
धीरेंद्र शास्त्री का बयान और उसका संदर्भ
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने एक बार फिर अपने बयान से सुर्खियां बटोरी हैं। इस बार उन्होंने इतिहास और हिंदू शौर्य को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि “जो लोग महान योद्धा राणा सांगा पर सवाल उठाते हैं, उन्हें अपनी बुद्धि की शुद्धि कर लेनी चाहिए।”
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान उन लोगों को जवाब देने के लिए था, जो इतिहास में हिंदू वीरों की भूमिका और उनके संघर्षों पर प्रश्न उठाते हैं।
राणा सांगा कौन थे?
राणा सांगा, जिन्हें महाराणा संग्राम सिंह के नाम से भी जाना जाता है, मेवाड़ के महान शासक थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई युद्ध लड़े और मुगलों समेत कई विदेशी आक्रमणकारियों को कड़ी टक्कर दी।
- उनका जन्म 12 अप्रैल 1482 को हुआ था।
- वे मेवाड़ के सिसोदिया वंश के महान योद्धा थे।
- उन्होंने खानवा के युद्ध (1527) में बाबर के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष किया।
- कई घाव खाने के बावजूद वे आखिरी दम तक हिंदू स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़े।
धीरेंद्र शास्त्री का बयान क्यों महत्वपूर्ण है?
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट किया कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिशें बंद होनी चाहिए।
- उन्होंने कहा कि हिंदू वीरों के बलिदान को कम आंकना गलत है।
- इतिहास में राणा सांगा जैसे योद्धाओं को कमजोर दिखाने की कोशिशें हो रही हैं।
- हिंदू समाज को अपने गौरवशाली अतीत को जानना और समझना जरूरी है।
इतिहास के साथ छेड़छाड़ पर नाराजगी
पंडित धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना एक बड़ी साजिश है।
- उन्होंने कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास को धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- राणा सांगा, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी जैसे योद्धाओं को कमजोर दिखाने की कोशिश हो रही है।
- ऐसे लोगों की बुद्धि की शुद्धि के लिए उन्हें सच्चे इतिहास को पढ़ना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री के समर्थकों की प्रतिक्रिया
धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के बाद उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर जोरदार प्रतिक्रिया दी।
- #BuddhiKiShuddhi और #RanaSanga जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
- कई लोगों ने इतिहास से जुड़े प्रमाण और तथ्य शेयर किए।
- हिंदू संगठनों ने शास्त्री के बयान का समर्थन किया और इतिहास को सही तरीके से पढ़ाने की मांग की।
राजनीतिक हलकों में हलचल
धीरेंद्र शास्त्री के बयान से राजनीतिक जगत में भी चर्चा शुरू हो गई।
- कुछ नेताओं ने उनके बयान का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे “धार्मिक ध्रुवीकरण” बताया।
- कुछ इतिहासकारों ने कहा कि इतिहास को निष्पक्षता से देखना चाहिए।
- हिंदू संगठनों ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान को सही ठहराते हुए इतिहास के पुनर्लेखन की जरूरत बताई।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इतिहासकारों के अनुसार, राणा सांगा भारतीय इतिहास के महान योद्धाओं में से एक थे।
- वे 120 से अधिक घाव खाने के बाद भी लड़ते रहे।
- उनका लक्ष्य भारत को विदेशी आक्रमणकारियों से मुक्त कराना था।
- उनकी वीरता और संघर्ष को इतिहास में उचित सम्मान मिलना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान हिंदू वीरों के इतिहास और गौरव की रक्षा के लिए दिया गया संदेश माना जा रहा है।
- उन्होंने कहा कि जो लोग राणा सांगा जैसे योद्धाओं पर सवाल उठाते हैं, उन्हें इतिहास को सही तरीके से पढ़ना चाहिए।
- इतिहास के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
- यह बयान हिंदू समाज को अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने का एक प्रयास है।
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