‘ब्रेस्ट छूना रेप नहीं…’ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फैसले के कुछ हिस्सों पर लगाई रोक

‘ब्रेस्ट छूना रेप नहीं…’ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फैसले के कुछ हिस्सों पर लगाई रोक


इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक विवादित आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि ‘ब्रेस्ट पकड़ना’ और ‘पजामे का नाड़ा तोड़ना’ बलात्कार या बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे संवेदनहीन बताया और कड़ी आपत्ति जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई संवेदनशीलता की कमी

बुधवार को हुई सुनवाई में जस्टिस भूषण आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस फैसले पर सवाल उठाए। जस्टिस गवई ने कहा, “हमें यह देखकर खेद है कि एक जज ने इस तरह के कठोर शब्दों का प्रयोग किया।” सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 24, 25 और 26 को विशेष रूप से संवेदनहीन बताते हुए कहा कि इनमें पीड़िता के प्रति सहानुभूति की पूर्ण कमी है।

चार महीने बाद आया फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया था, बल्कि सुनवाई पूरी होने के चार महीने बाद सुनाया गया था। इसके बावजूद, फैसले में संवेदनशीलता की कमी थी, जो न्यायपालिका की निष्पक्षता और समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय है।

पीड़िता की मां ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया

इस मामले में पीड़िता की मां ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनकी याचिका को भी इस केस के साथ जोड़ा जाएगा और दोनों मामलों पर एक साथ सुनवाई होगी। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार को भेजा नोटिस

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल और अटॉर्नी जनरल से इस मामले में अदालत की सहायता करने को कहा। साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए उनसे दो सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले पर देशभर में गुस्सा

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले पर पूरे देश में आक्रोश है। महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले संगठनों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस फैसले को लेकर जमकर विरोध जता रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला एक खतरनाक नजीर पेश कर सकता था। इससे अपराधियों को गलत संदेश जाता और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था।

आगे क्या होगा?

अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। कोर्ट ने हाईकोर्ट के विवादित आदेश पर अस्थायी रोक लगाई है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में गहराई से जांच करेगा और आवश्यक कार्रवाई करेगा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और संवेदनशीलता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब यह देखना होगा कि आगे इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।


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