“जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों का विरोध, हड़ताल और प्रदर्शन शुरू”
इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। बड़ी संख्या में वकील उनके ट्रांसफर का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे किसी भी न्यायाधीश को वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस विरोध के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
वकीलों की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में नहीं चाहिए भ्रष्टाचार के आरोपी जज
वकीलों का कहना है कि जस्टिस यशवंत वर्मा पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और उनका इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादला अस्वीकार्य है। बार एसोसिएशन ने साफ तौर पर कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट कोई कूड़ाघर नहीं है, जहां विवादित न्यायाधीशों को भेजा जाए।
क्यों हो रहा है विरोध?
दरअसल, हाल ही में जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास में आग लगी थी, जिसके बाद करोड़ों रुपये कैश जलने की खबर सामने आई थी। इस घटना के बाद से वे विवादों में घिर गए हैं। वहीं, जब उनके प्रयागराज हाईकोर्ट में ट्रांसफर की खबरें आईं, तो वकीलों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
बार एसोसिएशन का ऐलान: अनिश्चितकालीन हड़ताल
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए 25 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। बार एसोसिएशन ने दावा किया कि इस विरोध प्रदर्शन को देशभर की हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों का समर्थन मिल रहा है।
22 हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों का समर्थन
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने बताया कि इस मुद्दे पर देश की 22 हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की साख बनाए रखने के लिए है। अगर भ्रष्टाचार के आरोपी जजों को ट्रांसफर कर दिया जाएगा, तो न्यायिक प्रणाली पर सवाल खड़े होंगे।”
क्या है पूरा मामला?
पिछले दिनों दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास में आग लगी थी। इस दौरान, उनके घर से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में कैश जलने की खबरें सामने आईं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि उस वक्त जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे।
इस घटना के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की मांग उठाई। बार एसोसिएशन ने अपनी जनरल बॉडी मीटिंग में 11 प्रस्ताव पारित किए, जिनमें से एक प्रमुख प्रस्ताव यह था कि इस मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराई जाए।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर जस्टिस यशवंत वर्मा ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके आवास पर आग लगने के बाद किसी भी कर्मचारी ने कैश नहीं देखा। दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय को दिए गए अपने जवाब में उन्होंने कहा, “जब आग लगी, तो मेरी बेटी और निजी सचिव ने अग्निशमन सेवा को सूचना दी थी। आग बुझाने के दौरान सभी कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों को घटनास्थल से दूर रहने के लिए कहा गया था। आग बुझने के बाद जब वे लौटे, तो वहां कोई कैश नहीं था।”
अब क्या होगा आगे?
वकीलों के विरोध और देशभर की बार एसोसिएशनों के समर्थन को देखते हुए यह मामला सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के समक्ष रखा जा सकता है। फिलहाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट में हड़ताल जारी है और अधिवक्ताओं ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।
सोशल मीडिया पर भी उबाल
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी हुई है। लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ANI ने इस मुद्दे पर एक ट्वीट किया, जिसे आप यहां देख सकते हैं:
🔗 X पर देखें –
#WATCH | Uttar Pradesh: Allahabad High Court Lawyers hold protest over the transfer of Delhi High Court judge Justice Yashwant Varma to Allahabad High Court pic.twitter.com/OFjxymypsr
— ANI (@ANI) March 25, 2025
इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ अधिवक्ताओं के विरोध ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
यह भी पढ़ें: 👇