कृष्ण मंदिर जाने के नियम: कृष्ण मंदिर जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान!

कृष्ण मंदिर जाने के नियम: कृष्ण मंदिर जाएं तो इन बातों का रखें ध्यान!


श्रीकृष्ण मंदिर जाने से पहले जरूर जान लें ये महत्वपूर्ण बातें

जब भी आप भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर जाएं, तो यह ध्यान रखें कि उनकी पीठ के दर्शन न करें। यह नियम सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कथा भी जुड़ी हुई है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की पीठ के दर्शन करना अशुभ माना जाता है।

क्यों नहीं करने चाहिए भगवान कृष्ण की पीठ के दर्शन?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान की पीठ पर अधर्म का वास होता है और उनके दर्शन करने से पुण्य का प्रभाव कम होता है। यह कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है और इसमें भगवान श्रीकृष्ण और असुर कालयवन की एक रोचक घटना का जिक्र मिलता है।

श्रीकृष्ण और कालयवन की कथा

प्राचीन काल में जरासंध नामक राजा ने श्रीकृष्ण से युद्ध किया। इस युद्ध में जरासंध का एक शक्तिशाली सहयोगी असुर कालयवन भी शामिल था। कालयवन अत्यंत बलशाली था और जब उसने श्रीकृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा, तो भगवान रणभूमि छोड़कर वहां से चले गए।

युद्ध से भागने के कारण ही उन्हें “रणछोड़” कहा जाने लगा। हालांकि, इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक कारण था।

भगवान श्रीकृष्ण ने कालयवन को कैसे हराया?

कालयवन श्रीकृष्ण के पीछे भागता रहा और उसने उनकी पीठ के दर्शन किए। लेकिन वह यह नहीं जानता था कि भगवान किसी को तभी दंड देते हैं जब उसके पुण्य समाप्त हो जाते हैं। श्रीकृष्ण जानते थे कि कालयवन के पिछले जन्म के पुण्य अभी बाकी हैं, इसलिए उन्होंने सीधे युद्ध करने के बजाय एक विशेष योजना बनाई।

भगवान उसे अपनी पीठ दिखाते हुए एक गुफा में चले गए। इस गुफा में राजा मुचुकुंद ध्यान में लीन थे। राजा को देवताओं से यह वरदान प्राप्त था कि यदि कोई उन्हें सोते समय जगाएगा, तो वह उनकी दृष्टि पड़ते ही भस्म हो जाएगा।

कालयवन ने श्रीकृष्ण को समझकर राजा मुचुकुंद को जगा दिया। जैसे ही मुचुकुंद की नजर कालयवन पर पड़ी, वह तुरंत भस्म हो गया।

क्या सीख मिलती है इस कथा से?

  1. भगवान की पीठ के दर्शन करने से अधर्म बढ़ता है।
  2. किसी को भी दंड तभी मिलता है जब उसके पुण्य समाप्त हो जाते हैं।
  3. भगवान की लीला को समझने के लिए हमें धैर्य और भक्ति की जरूरत होती है।
  4. भगवान कृष्ण सिर्फ बाहुबल से नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता से भी युद्ध करते थे।

कृष्ण मंदिर में दर्शन कैसे करें?

हमेशा भगवान के मुख की ओर से दर्शन करें।
भगवान की पीठ की ओर मुंह करके खड़े न हों।
मंदिर में शांत और एकाग्र मन से प्रार्थना करें।
भगवान के चरणों में श्रद्धा और समर्पण के भाव रखें।

निष्कर्ष

श्रीकृष्ण का हर कार्य एक गहरा संदेश देता है। उनकी पीठ के दर्शन करने से जुड़ी यह कथा हमें बताती है कि अधर्म और अन्याय के अंत के लिए समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए। इसलिए जब भी हम कृष्ण मंदिर जाएं, तो हमेशा उनके मुख की ओर से दर्शन करें और पीठ के दर्शन करने से बचें।

हरे कृष्ण! जय श्रीकृष्ण!


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