शीतला माता स्तोत्र: महिमा, आरती और पूजा का आध्यात्मिक महत्व

शीतला माता स्तोत्र: महिमा, आरती और पूजा का आध्यात्मिक महत्व

माता शीतला की पौराणिक महिमा

हिंदू धर्म में माता शीतला को रोग नाशक और स्वास्थ्य की देवी के रूप में पूजा जाता है। इनकी महिमा प्राचीन ग्रंथों और लोक मान्यताओं में वर्णित है। कई स्थानों पर माता शीतला को शताक्षी देवी के रूप में भी पूजा जाता है। स्कंद पुराण में इन्हें गर्दभ (गधा) पर विराजमान बताया गया है।

माता शीतला के हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते होते हैं। ये प्रतीकात्मक रूप से स्वच्छता और रोग निवारण को दर्शाते हैं:

  • कलश: ठंडे जल का प्रतीक, जो रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।
  • सूप: हवा करने का साधन, जो संक्रमण को दूर करता है।
  • झाड़ू: स्वच्छता का प्रतीक, जो रोगाणुओं को नष्ट करता है।
  • नीम के पत्ते: एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर, जो बीमारियों को फैलने से रोकते हैं।

माता शीतला और रोग निवारण

माता शीतला को विशेष रूप से चेचक, शीतला रोग, त्वचा संक्रमण, और अन्य संक्रामक बीमारियों की नाशक देवी माना जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, चेचक के रोगियों को माता शीतला की कृपा से ही राहत मिलती है।

माता शीतला के संग अन्य देवताएँ भी पूजित होती हैं:

  • ज्वरासुर – ज्वर (बुखार) का दानव।
  • ओलै चंडी बीबी – हैजे की देवी।
  • चौंसठ रोग – 64 प्रकार की बीमारियों की अधिष्ठात्री शक्तियाँ।
  • घेंटुकर्ण – त्वचा रोगों के देवता।
  • रक्तवती – रक्त संक्रमण की देवी।

स्कंद पुराण में वर्णित शीतला माता का स्तोत्र

स्कंद पुराण में माता शीतला की महिमा का वर्णन “शीतलाष्टक स्तोत्र” में मिलता है। इसे भगवान शिव ने लोक कल्याण के लिए रचा था। इस स्तोत्र का पाठ करने से रोग, दोष और पाप नष्ट होते हैं।

शीतलाष्टक स्तोत्र

वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।  
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।  

शीतलाष्टक स्तोत्र का अर्थ:

मैं माता शीतला की वंदना करता हूँ, जो गर्दभ पर विराजमान, दिगम्बर और स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनके हाथों में झाड़ू, कलश और सूप हैं, जो रोग नाशक शक्तियों का प्रतीक हैं।

माता शीतला की पूजा विधि

माता शीतला की आराधना विशेष रूप से चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को की जाती है। इसे शीतला अष्टमी कहा जाता है।

🔹 पूजा विधि:

  1. प्रातः स्नान कर माता शीतला की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।
  2. माता को बासी भोजन (बसौड़ा) का भोग लगाएँ।
  3. नीम के पत्तों से जल का छिड़काव करें।
  4. शीतलाष्टक स्तोत्र का पाठ करें।
  5. माता शीतला की आरती गाएँ और रोगों से रक्षा की प्रार्थना करें।

माता शीतला की आरती

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,  
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता।। जय...  

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,  
ऋद्धि सिद्धि चंवर डोलावें, जगमग छवि छाता।। जय...  

इन्द्र मृदंग बजावत, चन्द्र वीणा हाथा,  
सूरज ताल बजाते, नारद मुनि गाता।। जय...  

माता शीतला की कृपा से होने वाले लाभ

संक्रामक रोगों से रक्षा
स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति
शारीरिक और मानसिक शांति
स्वच्छता और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
परिवार में सुख-शांति

निष्कर्ष

माता शीतला की आराधना स्वास्थ्य, शुद्धता और रोग निवारण से जुड़ी हुई है। इनके पूजन से संक्रामक रोगों से रक्षा होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। माता शीतला का शीतलाष्टक स्तोत्र और आरती न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से लाभकारी है, बल्कि यह स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी प्रेरित करता है।


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