शीतला अष्टमी 2025: व्रत, पूजा विधि और महत्व | जानें शुभ तिथि और नियम

शीतला अष्टमी 2025: व्रत, पूजा विधि और महत्व | जानें शुभ तिथि और नियम

🔱 शीतला अष्टमी 2025 (शीतला जयंती) – 22 मार्च 2025, शनिवार 🔱

शीतला अष्टमी 2025 व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे होली के बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा करने से रोगों से मुक्ति, घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


शीतला अष्टमी 2025: शुभ मुहूर्त और तिथि

📅 व्रत तिथि: 22 मार्च 2025, शनिवार
🕉 अष्टमी तिथि प्रारंभ: 21 मार्च 2025, रात 09:22 बजे
🕉 अष्टमी तिथि समाप्त: 22 मार्च 2025, रात 08:35 बजे


शीतला अष्टमी 2025 व्रत का महत्व

रोगों से रक्षा: माता शीतला की पूजा करने से चेचक, खसरा, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है।
परिवार में सुख-शांति: घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और समृद्धि का वास होता है।
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा: माता शीतला की कृपा से जीवन में शीतलता और संतुलन बना रहता है।
संतान सुख एवं धन लाभ: माता शीतला का आशीर्वाद संतान प्राप्ति और धन वृद्धि में सहायक होता है।


शीतला अष्टमी 2025 व्रत एवं पूजा विधि

🔹 बासौड़ा पर्व का विशेष महत्व: इस दिन बासी भोजन (बासौड़ा) खाया जाता है, जो एक दिन पहले तैयार किया जाता है।
🔹 सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
🔹 माता शीतला की प्रतिमा या चित्र के सामने कलश स्थापित करें और संकल्प लें।
🔹 माता को जल, रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें।
🔹 माता को बासी भोजन (बासौड़ा), दही-चावल, गुड़, मीठा भात, बेसन के लड्डू और ठंडा दूध अर्पित करें।
🔹 नीम की पत्तियों और जल से घर में छिड़काव करें ताकि शुद्धता बनी रहे।
🔹 माता शीतला का विशेष मंत्र जपें:

॥ ॐ ह्रीं शीतलायै नमः ॥
“शीतलायै नमस्तुभ्यं निनाशयाम्यहं ज्वरम्।
विष्फोटकं च मे देवि ग्रहमारुचिकां तथा॥”

🔹 माता की कथा सुनें और आरती करें।
🔹 सभी परिवारजनों को माता का प्रसाद वितरित करें।


शीतला अष्टमी 2025: माता शीतला को अर्पित किए जाने वाले भोग

बासी भोजन (बासौड़ा)
दही-चावल
बेसन के लड्डू
ठंडा दूध
गुड़ और मीठा भात
नीम की पत्तियां
हरी मूंग दाल


शीतला अष्टमी 2025 का आध्यात्मिक महत्व

माता शीतला केवल शारीरिक रोगों का ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक अशुद्धियों का भी नाश करती हैं। वे भक्तों को शीतलता, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं। उनकी उपासना से जीवन में संतुलन और सकारात्मकता आती है।

“हे माता शीतला, अपने भक्तों की रक्षा करो और हमें आरोग्य, सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करो।”


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