मुजफ्फरपुर स्टेशन मंदिर विवाद: हनुमान मंदिर हटाने पर हंगामा, रेलवे ट्रैक की मस्जिद हटाने की मांग तेज

मुजफ्फरपुर स्टेशन मंदिर विवाद: हनुमान मंदिर हटाने पर हंगामा, रेलवे ट्रैक की मस्जिद हटाने की मांग तेज


बिहार के मुजफ्फरपुर में मुजफ्फरपुर स्टेशन मंदिर विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा हनुमान मंदिर को हटाए जाने के विरोध में हिंदू संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल पुराने स्थान पर मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग की, बल्कि रेलवे ट्रैक के बीच स्थित मस्जिद को हटाने की मांग भी तेज कर दी। हालात को देखते हुए स्टेशन परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

हनुमान मंदिर हटाने पर बढ़ा आक्रोश

रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों के तहत सौ साल पुराने हनुमान मंदिर को हटाया, जिसके बाद हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अंतरराष्ट्रीय सनातन हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने इस कदम का कड़ा विरोध किया और मांग की कि मंदिर को पुनः स्थापित किया जाए।

प्रदर्शन के दौरान संगठनों के नेताओं ने रेलवे प्रशासन से मूर्तियों को हटाने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज दिखाने को कहा। हालांकि, रेलवे अधिकारियों द्वारा इस पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिससे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और बढ़ गया।

रेलवे ट्रैक की मस्जिद हटाने की मांग

प्रदर्शनकारी केवल मंदिर पुनर्निर्माण की मांग ही नहीं कर रहे, बल्कि रेलवे ट्रैक के बीच स्थित मस्जिद को हटाने की भी मांग जोर पकड़ने लगी है। हिंदू संगठनों का कहना है कि अगर मंदिर को विकास कार्यों के तहत हटाया गया, तो रेलवे ट्रैक के बीच बनी मस्जिद को भी हटाया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर रहा है और धार्मिक भेदभाव किया जा रहा है।

पुलिस और प्रशासन सतर्क

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रेलवे स्टेशन परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। जीआरपी और आरपीएफ के जवान लगातार निगरानी कर रहे हैं। इस दौरान रेलवे अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई।

अंतरराष्ट्रीय सनातन हिंदू वाहिनी के अध्यक्ष आचार्य चंद किशोर पाराशर ने चेतावनी दी है कि अगर दस दिनों के भीतर मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं किया गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंप दिया है, जिसमें मांग की गई है कि जहां मंदिर था, वहीं पुनः मंदिर का निर्माण किया जाए और देवी-देवताओं की मूर्तियों को पुनः स्थापित किया जाए।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

रेलवे प्रशासन ने अब तक इस विवाद पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले की समीक्षा की जा रही है और उच्च अधिकारियों से चर्चा के बाद कोई निर्णय लिया जाएगा।

इस बीच, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और रेलवे प्रशासन के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

स्थानीय लोगों की राय

स्थानीय निवासियों में भी इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कुछ लोग मानते हैं कि रेलवे विकास कार्यों के तहत मंदिर हटाना जरूरी था, लेकिन उनका यह भी कहना है कि इस फैसले से पहले हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं को विश्वास में लेना चाहिए था। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि अगर मंदिर हटाया गया है, तो मस्जिद को भी हटाया जाना चाहिए, ताकि सभी के साथ समान व्यवहार हो।

आगे की रणनीति

मुजफ्फरपुर स्टेशन मंदिर विवाद के चलते अब राजनीति भी तेज हो गई है। कई राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर बयान दिए हैं और इसे धार्मिक असंतुलन का मामला बताया है।

प्रदर्शनकारी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि मंदिर को फिर से उसी स्थान पर स्थापित किया जाए, जहां यह पहले था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रेलवे प्रशासन और सरकार इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।

निष्कर्ष

मुजफ्फरपुर स्टेशन मंदिर विवाद अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। हिंदू संगठनों का विरोध जारी है और रेलवे प्रशासन के सामने अब एक बड़ी चुनौती है। प्रशासन को जल्द से जल्द समाधान निकालना होगा, अन्यथा यह विवाद और गहरा सकता है।


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