संभल जामा मस्जिद ASI रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश

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संभल जामा मस्जिद ASI रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की ऐतिहासिक जामा मस्जिद को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट में मस्जिद के संरचनात्मक बदलावों का उल्लेख किया गया है। इनमें फर्श का टाइल्स और पत्थरों से बदलना, दीवारों पर तामचीनी पेंट करना, और कुछ हिस्सों की जर्जर स्थिति शामिल हैं।

ASI रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

✔️ फर्श में बदलाव – टाइल्स और पत्थर लगाए गए। ✔️ दीवारों पर लाल, हरे, पीले और सुनहरे रंग की तामचीनी पेंट की गई, जिससे मूल सतह ढक गई। ✔️ मुख्य द्वार की लकड़ी क्षतिग्रस्त हो चुकी है और इसे बदलने की आवश्यकता है। ✔️ पश्चिम और उत्तर दिशा में स्थित छोटे कक्ष जर्जर हो गए हैं।


ASI टीम ने कब और कैसे किया निरीक्षण?

हाईकोर्ट के आदेश पर 27 फरवरी 2025 को ASI की टीम ने मस्जिद का निरीक्षण किया। टीम में ये अधिकारी शामिल थे: 🔹 संयुक्त महानिदेशक मदन सिंह चौहान 🔹 निदेशक स्मारक जुल्फेगर अली 🔹 पर्यवेक्षण पुरातत्वविद् मेरठ सर्कल विनोद सिंह रावत

निरीक्षण के दौरान मस्जिद कमेटी के सदस्य भी उपस्थित थे। रिपोर्ट के अनुसार, पहले भी मस्जिद में मरम्मत और पुनरोद्धार का कार्य किया गया, जिससे इसकी ऐतिहासिक संरचना प्रभावित हुई है।


संभल जामा मस्जिद का ऐतिहासिक महत्व

संभल जामा मस्जिद को 22 दिसंबर 1920 को प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 के तहत संरक्षित घोषित किया गया। यह एक विशाल गुंबदनुमा संरचना है, जिसके चारों ओर बड़ा आंगन स्थित है।

🔸 मुख्य द्वार पूर्व दिशा में स्थित है, जहां जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। 🔸 बीच में वजू के लिए एक जलाशय मौजूद है। 🔸 समय के साथ कई मरम्मत कार्य किए गए हैं, जिससे इसका मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है।


ASI की मस्जिद के संरक्षण को लेकर टिप्पणी

✔️ दीवारों की तामचीनी पेंट अभी अच्छी स्थिति में है, इसलिए इसे हटाने की आवश्यकता नहीं। ✔️ मुख्य द्वार की लकड़ी कमजोर हो चुकी है, इसे बदला जाना चाहिए। ✔️ पिछले हिस्से के छोटे कमरे जर्जर स्थिति में हैं। उनकी छतें कमजोर हो गई हैं और उन्हें मरम्मत की जरूरत है।


ASI करेगी विस्तृत सर्वेक्षण – मूल स्वरूप की होगी बहाली

हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, ASI अब इस ऐतिहासिक धरोहर का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके अंतर्गत हुए बदलावों की पहचान कर मूल स्वरूप को बहाल करने के लिए कार्य योजना तैयार की जाएगी।

आगे की योजना:

ASI मेरठ सर्कल मस्जिद का डिजिटल सर्वे करेगा।संरक्षित स्मारक के रूप में इसकी बहाली की योजना तैयार की जाएगी।मस्जिद की सफाई, धूल हटाने और वनस्पतियों को साफ करने का कार्य किया जाएगा।मस्जिद कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वे ASI के कार्य में बाधा न डालें।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद, ASI का यह सर्वेक्षण ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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