महाकुंभ 2025: प्रयागराज में बने तीन विश्व रिकॉर्ड, गिनीज बुक में दर्ज हुआ ऐतिहासिक नाम

प्रयागराज महाकुंभ 2025 ने न केवल आध्यात्मिक आस्था और सांस्कृतिक समागम का प्रतीक बनकर इतिहास रचा, बल्कि इस बार इस महापर्व ने तीन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किए। गंगा सफाई अभियान, सामूहिक हैंड पेंटिंग और महाकुंभ क्षेत्र की सफाई को लेकर इन रिकॉर्ड्स को आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स टीम ने गुरुवार को महाकुंभ स्थल पर पहुंचकर प्रमाण पत्र सौंपे।

महाकुंभ 2025 में बने तीन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

1. गंगा सफाई में ऐतिहासिक कीर्तिमान

महाकुंभ 2025 के दौरान सबसे बड़े सामूहिक नदी सफाई अभियान का रिकॉर्ड बनाया गया। इस अभियान में 329 स्थानों पर एक साथ गंगा सफाई की गई, जो पूर्व निर्धारित 250 स्थानों के लक्ष्य से कहीं अधिक था। इस विशाल अभियान ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपनी जगह बना ली।

2. सामूहिक हैंड पेंटिंग में नया विश्व रिकॉर्ड

इस महाकुंभ में कला और संस्कृति को भी वैश्विक पहचान मिली। 10,102 लोगों ने एक साथ भाग लेकर सामूहिक हैंड पेंटिंग बनाई, जो कि महाकुंभ की रचनात्मकता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनी। इससे पहले यह रिकॉर्ड 7,660 लोगों का था, जिसे प्रयागराज महाकुंभ 2025 ने तोड़कर नया इतिहास रच दिया।

3. सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान – सामूहिक झाड़ू लगाकर नया कीर्तिमान

महाकुंभ क्षेत्र की सफाई के लिए 19,000 लोगों ने एक साथ झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 10,000 लोगों के नाम था, जिसे इस बार लगभग दोगुना कर दिया गया। यह पहल न केवल एक नया विश्व रिकॉर्ड बनी, बल्कि स्वच्छता और सामूहिक प्रयासों की भावना को भी मजबूत किया।

प्रयागराज महाकुंभ 2025 बना ‘रिकॉर्ड्स का महाकुंभ’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं, जिनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रमाण पत्र के साथ नजर आए।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महाकुंभ 2025 का भव्य आयोजन पूरी दुनिया को अचंभित कर रहा है। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत और एकता की गौरव गाथा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।”

महाकुंभ 2025: आध्यात्मिकता, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संगम

महाकुंभ 2025 ने न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि भारत न केवल अपनी धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रयागराज महाकुंभ अब ‘रिकॉर्ड्स का महाकुंभ’ बन गया है, जिसने पूरी दुनिया में भारत की आध्यात्मिक शक्ति और एकजुटता की मिसाल पेश की है।

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